बचपन की एक धुंधली सी याद आज भी मेरे जेहन में उतनी ही चटक है, जितनी वो उस वक्त थी। कार्तिक का महीना था, बाहर हल्की ठंडक घुली हुई थी और मैं घर के कोने में मिट्टी के दीये कतार से रख रहा था। तभी पीछे से पिताजी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। जो मेरे गुरु भी थे, जिन्होंने रामायण और भागवत को सिर्फ पढ़ा नहीं, बल्कि जिया था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, "बेटा, असली रोशनी का रास्ता हमेशा अंदर की तरफ होना चाहिए।" आज जब अचानक कानों में स्वाति मिश्रा की आवाज में गाया यह बेहद खूबसूरत भजन पड़ा, तो मुझे वो दीये और पिताजी की बात याद आ गई।
भजन पाठ
राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी,
दीप जला के दीवाली मैं मनाऊंगी,
मेरे जन्मों के सारे पाप मिट जाएंगे,
राम आएंगे...
राम झूलेंगे तो पालना झुलाऊंगी,
मीठे-मीठे भजन सुनाऊंगी,
मेरी जिंदगी के सारे दुख मिट जाएंगे,
राम आएंगे...
मैं तो रुचि-रुची भोग लगाऊंगी,
माखन मिश्री मैं राम को खिलाऊंगी,
प्यारी प्यारी सुरतिया पे वारी वारी जाऊंगी,
राम आएंगे...
शबरी संवारती थी जैसे अपनी कुटिया,
वैसे ही सजाऊंगी मैं अपनी ये कुटिया,
मेरे घर के भी सारे भाग्य खुल जाएंगे,
राम आएंगे...
राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी,
दीप जला के दीवाली मैं मनाऊंगी,
मेरे जन्मों के सारे पाप मिट जाएंगे,
राम आएंगे...
Lyrics in Hinglish
Ram aayenge to angna sajaungi,
Deep jala ke diwali main manaungi,
Mere janmo ke saare paap mit jayenge,
Ram aayenge...
Ram jhoolenge to paalna jhulaungi,
Meethe-meethe bhajan sunaungi,
Meri zindagi ke saare dukh mit jayenge,
Ram aayenge...
Main to ruchi-ruchi bhog lagaungi,
Maakhan mishri main Ram ko khilaungi,
Pyaari pyaari suratiya pe vaari vaari jaungi,
Ram aayenge...
Shabri sanwaarti thi jaise apni kutiya,
Vaise hi sajaungi main apni ye kutiya,
Mere घर के भी saare bhaagya khul jayenge,
Ram aayenge...
इस भजन का भावार्थ:
श्री राम का स्वागत बाहर नहीं, भीतर होता है
जब हम इस भजन की एक-एक लाइन को सुनते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे त्रेतायुग की कोई साध्वी या माता शबरी आज के समय में हमारे सामने आकर बैठ गई हैं। सीधा और सरल सा अर्थ है—"जब मेरे राम आएंगे, तो मैं अपने घर का आंगन सजाऊंगी।"
लेकिन जैसे-जैसे आप इस भजन में डूबते हैं, धीरे-धीरे महसूस होता है कि यह सजावट केवल घर की नहीं, हमारे भीतर के भावों की भी है। जब भक्त कहता है कि 'दीप जला के दीवाली मैं मनाऊंगा', तो वह असल में अपने भीतर फैले उदासी के अंधेरे को दूर करने की बात कर रहा होता है।
भजन में आगे जो वात्सल्य भाव है—राम को पालना झुलाना, माखन-मिश्री का भोग लगाना—यह दिखाता है कि भगवान के साथ हमारा रिश्ता कितना अनौपचारिक और सगा हो सकता है।
मुझे याद है, कुछ साल पहले मैं अयोध्या की एक तंग गली के पुराने मंदिर में बैठा था। वहाँ एक बूढ़ी माई फटे हुए आसन पर बैठकर यही भजन गा रही थीं। उनके पास भोग लगाने के लिए सिर्फ दो मिश्री के दाने थे, लेकिन उनकी आँखों में जो चमक थी, उसने मुझे सिखाया कि भगवान कोई दूर आसमान में बैठी ताकत नहीं हैं, वो तो इतने भोले हैं कि बस सच्चे प्रेम के भूखे हैं।
आज के दौर में धैर्य की परीक्षा
इस भजन के पीछे जो सबसे बड़ा दर्शन छिपा है, वो है 'प्रतीक्षा' और 'विश्वास'। आज जब हम हर काम तुरंत पूरा होने की उम्मीद रखते हैं, तब यह भजन हमें धैर्य और विश्वास का महत्व याद दिलाता है। हमें दो मिनट में सब कुछ चाहिए, लेकिन भक्ति ठहराव मांगती है।
बचपन में सुनी एक बात याद आती है कि शबरी को उनके गुरु ने कहा था कि राम एक दिन तुम्हारी कुटिया में जरूर आएंगे। शबरी ने कोई सवाल नहीं किया कि कब आएंगे?
वह बूढ़ी हो गई, लेकिन उसने रोज रास्ता साफ करना नहीं छोड़ा। यही अटूट विश्वास इस भजन का असली संदेश है। जब आप बिना किसी शिकायत के इंतजार करते हैं, तो ईश्वर को आना ही पड़ता है।
इस भजन से क्या शिक्षा मिलती है
मैंने सोचा कि इस भजन में सिर्फ भक्ति है। लेकिन जब गहराई से सोचा, तो पता चला कि ये जीवन का एक बड़ा सबक है।
इंतज़ार की कला। आज की दुनिया में हम कुछ भी इंतज़ार नहीं कर सकते। फोन की बैटरी दो मिनट लेट चार्ज हो तो परेशान हो जाते हैं। लेकिन ये भजन सिखाता है कि सच्चा प्रेम इंतज़ार में है। जो रोज अपने आंगन को सजाता है, वो कभी निराश नहीं होता। क्योंकि सजावट में ही आनंद है।
स्वागत की भावना। हम बड़े-बड़े मेहमानों के लिए तो सब कुछ करते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि हमारे अंदर जो परमात्मा बैठे हैं, उनके लिए हमने क्या किया? ये भजन कहता है कि पहले अपने अंदर के आंगन को साफ करो। बाहर की सफाई आसान है, अंदर की मुश्किल।
सरलता का महत्व। भजन में माखन-मिश्री का ज़िक्र है। कोई बड़ी चीज़ नहीं। साधारण माखन, साधारण मिश्री। लेकिन भाव अगर सच्चा हो, तो साधारण भी असाधारण बन जाता है। मेरी माँ हर सोमवार शिवजी को बेलपत्र चढ़ाती हैं। बस एक पत्ता। लेकिन उनकी आँखों में जो श्रद्धा होती है, वो शायद हज़ारों रुपयों के चढ़ावे में नहीं मिलती।
उम्मीद। "मेरी जिंदगी के सारे दुख मिट जाएंगे" — ये उम्मीद है। जीवन बहुत कठिन हो जाता है कभी-कभी। रातें बहुत लंबी लगती हैं। लेकिन ये भजन कहता है कि राम आएंगे। बस इस एक उम्मीद से जी लो। उम्मीद ही तो जीवन है।
इस भजन का गूढ़ संदेश
अब आते हैं सबसे गहरे हिस्से पर। इस भजन का सबसे बड़ा संदेश ये है कि राम बाहर से नहीं आते, अंदर से आते हैं।
हम सब सोचते हैं कि कोई दिन होगा, कोई मौका होगा, और राम हमारे दरवाज़े पर खड़े होंगे। लेकिन सच तो ये है कि राम तो हमारे अंदर ही हैं। बस हमने उनके आने की तैयारी नहीं की।
"अंगना सजाऊंगी" का मतलब है अपने मन को साफ करना। "दीप जलाऊंगी" का मतलब है ज्ञान का प्रकाश फैलाना। "पालना झुलाऊंगी" का मतलब है अपने भावों को मीठा बनाना। "भोग लगाऊंगी" का मतलब है अपने कर्मों को भगवान् को समर्पित करना।
मेरे पिताजी कहा करते थे, "बेटा, राम को बुलाने के लिए मुँह से राम-राम काफी नहीं। दिल से राम-राम चाहिए।" और ये भजन वही दिल से निकला राम-राम है।
एक और बात। इस भजन में "मेरे जन्मों के सारे पाप मिट जाएंगे" लिखा है। ये हिंदू दर्शन की एक गहरी बात है — कर्म और मोक्ष। हम जो भी करते हैं, उसका फल भोगना पड़ता है। लेकिन जब भगवान् का प्रेम हृदय में आता है, तो वो कर्मों की बेड़ियाँ तोड़ देता है। ये नहीं कि पाप मिट जाते हैं, बल्कि पापों को देखने की हमारी दृष्टि बदल जाती है। हम समझ जाते हैं कि ये सब तो एक नाटक था, और राम निर्देशक हैं।
संगीत प्रेमियों के अनुसार भजन का शास्त्रीय पहलू
अगर इस भजन के संगीत और धुन की बात करें, तो संगीत प्रेमियों के अनुसार इस भजन में राग भैरवी के भावों की झलक महसूस होती है।
भैरवी एक ऐसा राग है जिसमें एक अजीब सी तड़प, करुणा और समर्पण होता है। जब इस भजन में वो कोमल स्वर गूंजते हैं, तो सुनने वाले का दिल अंदर से एक अजीब से आनंद और सुकून से भर उठता है।
एक छोटी सी याद
अंत में मैं एक बात और कहना चाहूँगा। पिछले साल दीवाली के दिन, मैं अपने गाँव गया था। रात को माँ ने आंगन में दीपक जलाए। मैंने कहा, "माँ, बिजली तो है, क्यों दीपक?" उन्होंने कहा, "बेटा, बिजली की रोशनी से घर रोशन होता है, दीपक की रोशनी से दिल।"
उसी रात मैंने ये भजन फिर से सुना। और पहली बार ऐसा लगा कि माँ ने सही कहा। ये दीपक तो राम के आने का इंतज़ार है। ये आंगन की सजावट तो हमारे हृदय की सजावट है।
राम आएंगे। यकीन मानो, राम आएंगे। बस आप अपना आंगन साफ रखो। अपने दिल में एक दीपक जलाए रखो। और जब वो आएंगे, तो आपको पता भी नहीं
चलेगा। क्योंकि वो तो हमेशा आते ही रहते हैं। बस हम देख नहीं पाते।
जय श्री राम।
